Sad Motivational Shayari in hindi
Sad Motivational Shayari in hindi – ज़िंदगी हमेशा एक जैसी नहीं चलती। कभी अपनों का साथ छूट जाता है, कभी मोहब्बत में धोखा मिलता है, तो कभी नाकामी इंसान को अंदर तक हिला देती है। ऐसे वक्त में दिल को किसी सहारे की ज़रूरत होती है—एक ऐसा जरिया जो हमारे दर्द को ज़ुबान दे सके और साथ ही गिरने के बाद दोबारा संभलने की हिम्मत भी।
1. दिल का टूटना और तन्हाई का अहसास (Broken Heart & Loneliness)
जब इंसान का दिल टूटता है, तो ज़माने की हर आवाज़ शोर लगने लगती है और तन्हाई अपनी सी मालूम होती है। ऐसे में अपनी ही यादें साया बनकर साथ चलने लगती हैं।
1
दिन क्यों ढलता है, रात क्यों आती है,
मेरी जुबां पर उसकी बात क्यों आती है?
और बात प्यार, मोहब्बत, शादी तक हो तो सही भी,
ना जाने मोहब्बत के बीच ये जात क्यों आती है!
2
ज़माने के ताने पसंद आने लगे हैं,
दर्द भरे गाने पसंद आने लगे हैं।
और नए रिश्तों को तो आजमा कर देख लिया हमने,
अब कुछ लोग पुराने पसंद आने लगे हैं।
3
यह झूठ है, पर इसे हर दफ़ा लिखूँगा मैं,
पढ़ सके यह ज़माना सारा, इतना सफ़ा लिखूँगा मैं।
तुम बदले थे, यह कब से सुन रही है दुनिया,
आज इस नज़्म में खुद को बेवफ़ा लिखूँगा मैं।
तुमने मनाया होगा, मैं ही नहीं माना शायद,
तुम्हें तो आता था, मुझे ही नहीं आया निभाना शायद।
तुम तो चाहती थीं, हम जन्म-जन्म के लिए एक हो जाएँ,
मैं ही नहीं चाहता था तुमको पाना शायद।
शायद मैंने ही प्यार नहीं किया होगा,
तुमने तो किया था, पर मैंने ही प्यार नहीं किया होगा।
चल, सारी गलती मेरी है, आज कबूल करता हूँ,
रोजाना तुझे याद करके वक्त फिजूल करता हूँ।
अब इन आँखों को तेरा इंतजार नहीं है,
नहीं, ऐसा नहीं कि तुझसे प्यार नहीं है।
बस फिर से तुझे पा सकूँ इतनी मेरी औकात कहाँ,
तुझमें तो है जान, पर मुझमें वो बात कहाँ!
खैर, अपनी शादी का बुलावा देना, मैं आऊँगा जरूर,
एक ही निवाला सही, पर खाऊँगा जरूर।
आखिर कब तक आंसुओं से पेट भरता रहूँगा,
ऐसे कब तक तुझे याद करता रहूँगा!
उस दिन सबके सर पर सेहरे देखूँगा मैं,
पूरी रात रुककर सातों फेरे देखूँगा मैं।
वो सात वचन जब लोगी तुम, ईश्वर की कसम जब लोगी तुम,
तुम्हारी आँखों में शर्म देखनी है मुझे।
उस आग की लपटें भी चीख उठें,
अग्नि इतनी गर्म देखनी है मुझे।
उस दिन के बाद हर रात में नाचूँगा मैं,
जिस दिन तुम्हारी बारात में नाचूँगा मैं।
कोई पूछेगा कि रुखसती के वक्त यह आँखों में आँसू क्यों नहीं,
मैं हँसकर कह दूँगा—’मेरे महबूब की शादी है, मैं नाचूँ क्यों नहीं!’
4
फ़िज़ाएँ हसीन थीं, हवाओं में रवानी थी,
मोहब्बत में मेरी भी बड़ी प्यारी सी कहानी थी।
एक सोच खाए जा रही है आज भी मुझको,
मैं कैसे किसी के प्यार में इतनी दीवानी थी!
जिसे तेरे अलावा कुछ नज़र नहीं आता था,
मैं इतनी पागल थी, जिसे जरा भी सब्र नहीं आता था।
आता था तो वो सुकून, जब तेरी बाहों में होती थी,
अनसुनी की गई सिसकियाँ, जो मेरी आहों में होती थीं।
तुझे क्या पता, मैं कैसे मिलने आती थी तुझसे,
तुझे क्या पता, कितनी परेशानियाँ राहों में होती थीं।
पर सभी अड़चनों को तेरे साथ पार करती थी मैं,
अरे पागल! तुझसे बहुत प्यार करती थी मैं।
इतना प्यार कि तेरे साथ भाग जाना भी मुझे सही लगता था,
सभी दुश्मन लगते थे, फ़क़त एक वही रास्ता सही लगता था।
अपने सारे दर्दों को लटकाकर शाखों पर रखा,
तेरी सारी ही बातों को सर-आँखों पर रखा।
और आँखों पर रखा सारे ख्वाबों को सजाकर,
दुनिया से छुपाकर, दुनिया से बचाकर।
अब सजने-सँवरने का भी कोई शौक नहीं रहा,
दोबारा बिखरने का भी कोई शौक नहीं रहा।
पर मैं न चाहते हुए भी तेरी बातों में आ जाती हूँ,
कितनी बेशर्म हूँ, अकेले रातों में आ जाती हूँ।
पर तू भी तो मेरे इतना करीब आकर बोलता था,
आँखों में आँसू लाकर बोलता था।
जिंदगी भर साथ रहेगा कहता था न तू,
और तो और, मेरी कसम खाकर बोलता था!
5
चुपके से पास आता है रातों में,
एक चेहरा बहुत सताता है रातों में।
वह सारा दिन खामोशी से बस मेरी सुनता है,
सुनकर फिर अपनी सुनाता है रातों में।
वह शराब तो छूने तक नहीं देता मुझे,
सिर्फ अपनी आँखों से पिलाता है रातों में।
और घरवाले यही सोचकर परेशान रहते हैं आजकल,
यह लड़का जाने कहाँ जाता है रातों में!
सारा दिन बेशक रूठा रहे मुझसे,
बड़ी मोहब्बत से फिर मनाता है रातों में।
दिन भर जिसे याद करके सांस ली हमने,
फिर उसी का न होना हमें खाता है रातों में।
यह वहम है सबको कि अब हम साथ नहीं,
हमारा तो एक अलग ही नाता है रातों में।
लेखक ‘रंग’ अपने गज़लों में तेरा नाम लिखता है,
लिखकर फिर उसे मिटाता है रातों में।
6
इन काली अंधेरी रातों में तुझे बेहद याद करता हूँ,
मैं अक्सर अकेले तन्हा सा खुद से ही बात करता हूँ।
जब खुद से ही बात करता हूँ तो लोग पागल-आवारा समझते हैं,
कुछ लोग मेरे लिखने से मुझे बहुत नकारा समझते हैं।
पर मैं समझता हूँ कि वो समझते हैं क्या,
जो बरसते हैं वो गरजते हैं क्या!
मैं बरसता हूँ हर रोज आँखों से अपनी,
गरजता हूँ रोजाना बातों से अपनी।
बातों में ही तुझे पाने की हर रोज फरियाद करता हूँ,
मैं अक्सर अकेले तन्हा सा खुद से ही बात करता हूँ।
मुसलसल बस मैं एक सवाल का जवाब तलाशता हूँ,
कहीं तो लिखा होगा तूने, वो हिसाब तलाशता हूँ।
तलाशता हूँ इस सारे जहान में फ़क़त एक चेहरा,
जिसमें तू मिलने आती थी, वो ख्वाब तलाशता हूँ।
पर तू क्या, तेरा नामो-निशान तक नहीं दिखता,
पहले तो इतना था, आज परेशान तक नहीं दिखता।
इतनी नादानी न जाने कैसे हुई तुझसे,
मुझे तो तू इतना नादान तक नहीं दिखता।
बड़ी ही बदसलूकी आजकल सभी के साथ करता हूँ,
मैं अक्सर अकेले तन्हा सा खुद से ही बात करता हूँ।
2. क्या यही इश्क था? – मोहब्बत और बेवफ़ाई की दास्तान (Betrayal & Unspoken Questions)
जब वादे टूटते हैं और अपना माना हुआ शख्स गैर बन जाता है, तो दिल में ढेरों सवाल उमड़ते हैं। क्या वो सब सिर्फ एक छलावा था?
7
तो क्या वो इश्क था?
क्योंकि कभी जो नज़रें मेरा रास्ता देखा करती थीं,
मुझे ही देखकर जीती-मरती थीं,
आज वही नज़रें किसी और की नज़र में देखकर प्यार का इज़हार कर रही हैं,
तो क्या वो इश्क था?
क्योंकि कभी जो जिस्म मेरी बाहों में आने को तरसता था,
मेरे जरा से डाँट देने पर उसकी आँखों से बादल सा बरसता था,
आज वही जिस्म किसी और की बाहों में है।
और आज भी मैं उसे भूला नहीं हूँ,
क्योंकि आज भी वो चेहरा मेरी निगाहों में है,
तो क्या वो इश्क था?
क्योंकि कभी तुम मुझमें अपनी बाहें डालकर मेरी बाइक की पिछली सीट पर बैठा करती थीं,
मेरे कंधे पर तुम्हारा सर होता था और तेज़ हवाएँ तुम्हारी ज़ुल्फ़ों को छूकर गुजरती थीं,
पर न जाने क्यों आज हवाओं की बजाय तुमने अपना रुख मोड़ लिया,
तो क्या वो इश्क था?
क्योंकि कभी जो आवाज मुझे जगाने, हंसाने और मनाने के लिए निकलती थी,
(हाँ मुझे यह भी याद है कि तुम मुझे मनाती थीं, चाहे मेरी गलती थी)
आज वही आवाज किसी और को सताने के लिए निकलती है,
तो क्या वो इश्क था?
क्योंकि कभी जिन पलकों का सवेरा तब तक नहीं होता था जब तक वो हमारा दीदार न करती थीं,
कहीं उसकी जरा-जरा सी नादानियों से तंग आकर मैं उसे छोड़ न दूँ, इस बात को लेकर हर पल डरती थी,
आज उसकी हर सुबह की वजह सूरज की कुछ किरणें और किसी और शख्स का चेहरा बन गया है,
तो क्या वो इश्क था?
तेरे ऑनलाइन होने पर भी तेरे जवाब न देने पर यह समझकर मैं पल-पल मर रहा था,
कहीं तू किसी और की तो नहीं होने जा रही थी, इस बात को लेकर हर पल डर रहा था,
आँखें आँसू बहा रही थीं और मैं दिल को बहलाने का काम कर रहा था,
यह इश्क ही तो था!
अब दिल महफ़िलों से डरने लग गया है,
आँखें किसी और से मिलने से पहले ही पीछे हटती हैं।
खुदा तुझे भी एक दिन ऐसा दिखाए,
क्योंकि तुझे भी तो पता चले कि भीगे हुए तकिए पर रात कैसे कटती है!
कैसे छुप-छुप कर रोया जाता है,
कैसे पलकों के साथ-साथ हाथों को भी भिगोया जाता है।
तुझसे इतना प्यार करते हुए भी तुझे तड़पाने के बारे में सोचकर आँखें भर तो आती हैं,
लेकिन मैं भी क्या करूँ, जहाँ इतनी मोहब्बत होती है, वहाँ हद से ज्यादा नफरत हो ही जाती है।
मेरी किस्मत में तेरा प्यार न सही,
मैं तेरे दिए हुए दर्द के साथ भी अपनी जिंदगी गुज़ार सकता हूँ।
यह पर्वत, यह वादियाँ, यह आसमान सभी सुन लेंगे तेरे नाम को,
मैं इतनी जोर से तुझे पुकार सकता हूँ।
और धीरे-धीरे खत्म कर दूँगा हँसना, बोलना और खुद को भी,
मैं जिस तरह तू सोच भी नहीं सकती, मैं उस तरह भी खुद को मार सकता हूँ।
8
इश्क करने की तुझसे भूल हो जाए,
फिर तेरी मोहब्बत इस कदर फ़िजूल हो जाए।
कि बेइंतहा मोहब्बत कर बैठे तू जिससे,
उसे किसी और का प्यार कबूल हो जाए!
9
एक तारा आसमान से टूटकर आया है,
मेरा महबूब आज रकीब से रूठकर आया है।
और जो रोया है मेरी बाहों से लिपटकर,
फिर वो ऐसा लगा—बरसों बाद कोई कैदी जेल से छूटकर आया है!
12
एक चोट दिल पर गहरी लगा गए,
मानो मौत की सजा सुना गए।
यह सच है कि यह जख्म अब कभी भरेगा नहीं,
दिल चाहकर भी किसी से प्यार करेगा नहीं।
हाँ, तेरे जाने से यह दुनिया बेगानी लगती है,
मेरी दास्तान सुनने वालों को यह फ़क़त एक कहानी लगती है।
जख्म अब भी गहरा है, ताजा है और रहेगा हमेशा,
देखने वालों को तो मेरी चोट भी पुरानी लगती है।
ऐसा कोई दिन, कोई वक्त, कोई पल नहीं जाता,
जिसमें मुझे तेरा ख्याल नहीं आता।
नींद से जैसे कोई दुश्मनी सी हो गई है,
सांसों में कमी सी हो गई है।
अब कोई और छुए तुझे, सोचकर पल-पल मरता रहता हूँ,
नज़्म लिखता हूँ और उसे रात भर पढ़ता रहता हूँ।
अगर कभी मेरी यादों से तेरी आजादी हो जाए,
अगर किसी और के साथ तेरी शादी हो जाए,
तो हो सके तो मेरे इश्क का मुझे दाम देना,
अपने बेटे को मेरा ही नाम देना!
13
एक बाजार लगा मोहब्बत का, सौदेबाजी जोरों से हुई,
किसी को मिला खरीदार अच्छा, अपनी यारी चोरों से हुई।
हमको हमी से चुराया उसने, अपना रकीब खास बताया उसने,
लकीरें इन हाथों से फिसल गईं, वक्त बदला तो वो भी बदल गई।
जिस दिन अलग हुए तो “मर जाऊंगी” कहा करती थी,
मोहब्बत ही नहीं, हमारा गुस्सा भी सहा करती थी।
परछाई बनकर साथ रहती थी वो, दूर जाने पर आँखों से बहती थी वो,
कोई माने या न माने, “शादी तो आप ही से होगी यार”—कितना झूठ कहती थी वो!
14
उसकी दी हुई कुछ निशानी देखता हूँ,
बैठकर मैं तेरी नादानी देखता हूँ।
ऐसा हकीम मिले तो बताना हमें,
जो कहे—”मिया आओ, मैं हर परेशानी देखता हूँ।”
3. रातों का सन्नाटा और बिखरी यादें (Late Night Reflections & Memories)
रात की खामोशी में इंसान का अपने आप से सामना होता है। वही पुरानी बातें, आधी रात की तन्हाइयाँ और अनकहे अफ़साने दिमाग में घूमते रहते हैं।
19
चाँद में दाग होते हैं, यह हमें तब पता चला,
जब उस चाँद को किसी और के साथ रात गुज़ारते देखा।
25
ना सिर्फ कागज-कलम तुझे लिखने के लिए, यह रातें भी जरूरी हैं।
और एक तस्वीर के सहारे और कितने दिन गुज़ारूँ भला,
अब जिंदा रहने के लिए कुछ मुलाकातें भी जरूरी हैं।
29
मेरे घर की दीवारें और यह दरवाजा बोलता है,
पुकारता है तुझे, “वापस आजा” बोलता है।
दिल कुछ इस तरह से हुकूमत चलाता है मुझ पर,
जैसे अपनी प्रजा से कोई राजा बोलता है!
30
नतीजे मेरी मोहब्बत के कुछ खास तो आए नहीं,
प्यार से कुछ अक्षर कहे थे मैंने तुझे, राज़ तो आए नहीं।
और तू कहती है तेरे जिस्म से आती खुशबू मेरे इत्र की है,
मैं कहता हूँ—मेरे रकीब ने चुराया होगा शायद, क्योंकि हम पास तो आए नहीं!
31
तेरे बदलते मिज़ाज बता गया कोई,
तेरी ज़ुल्फ़ें सँवारने का अंदाज बता गया कोई।
और हमें लगा था तेरे मखमली होंठों पर हक सिर्फ हमारा है,
पर आज तेरी लिपस्टिक का स्वाद बता गया कोई!
35
ये किसकी याद आई हमें आधी रात में?
ज़ुबाँ पर किसकी बात आई आधी रात में?
पैरों तले जमीं खिसक गई वो मंज़र देखकर,
जब वो रकीब के साथ आई आधी रात में…
उसके मखमली से होंठ, मुलायम गाल और वो सर्द रात,
उसके बाद बरसात आई आधी रात में।
और आज रोको मत, जो होना है होने दो,
बड़े दिनों में हाथ आई आधी रात में।
और बाहों में लेटे हुए पूछा उसने कि “कितना कमा लेते हो?”
यानी बीच में औकात आई!
अगले महीने एक रात फोन आया उसका और कहा—”चिंता की कोई बात नहीं,”
तब जाकर सांस में सांस आई आधी रात में…
4. दर्द में भी हौसला और सब्र (Strength, Patience & Inner Hope)
अंधेरा चाहे जितना भी गहरा हो, सब्र और उम्मीद का एक छोटा सा दीया इंसान को टूटने नहीं देता। दर्द ही कभी-कभी हमारी सबसे बड़ी ढाल बन जाता है।
10
मुझे हौसला चाहिए, कोई दे सकता है?
उसके और मेरे बीच फैसला चाहिए, कोई दे सकता है?
और जिसमें उसका गुजारा हो सके, ऐसा घर तो नहीं बना पाया आज तलक,
अब एक छोटा सा घोंसला चाहिए, कोई दे सकता है?
11
जिस ढंग में रहा करते थे, वो ढंग कहाँ गया?
तन्हा ही चला हूँ हर रास्ते पर मैं, तेरे संग कहाँ गया?
और जिस दिन रंगा खुद को तेरे रंग में मैं, तो दुनिया कहेगी—
“बदले से लग रहे हो लेखक जी, आपका रंग कहाँ गया?”
18
बता मत उसे, जता मत उसे, इज़हार मत कर, बस प्यार कर।
इश्क सच्चा है तेरा, वो तुझे खुद मिल जाएगा, सब्र कर, थोड़ा इंतजार कर।
20
बेशुमार मोहब्बत होगी उस बारिश की बूंद को भी इस जमीन से,
यूँ ही नहीं कोई मोहब्बत में इतना गिर जाता है!
21
अब आधे ही फूल बचे हैं बगीचों में,
आधा बगीचा मेरी राहों में है।
और आसमा को भी कुबूल है आधा चाँद उसका,
क्योंकि आधा मेरी बाहों में है।
22
मन्नत तो माँग कर देख ली खुद के लिए, चलिए अब बददुआ माँग लेते हैं।
टूटते हुए तारे के दर्द से लोगों को फर्क नहीं पड़ता,
खुदगर्ज़ की तरह आँखें बंद करते हैं और दुआ माँग लेते हैं।
23
हमारे चेहरे पर अगर झूठी मुस्कान भी आए, तो उसके अंदर का दर्द सिर्फ तुम पहचानती हो।
यह जमाना जानता है मैं शायरियाँ लिखता हूँ,
पर शायरियाँ मुझे लिखती हैं, यह सिर्फ तुम जानती हो।
24
अपनों से दगा कर लूँ या सपनों से दगा कर जाऊँ मैं?
कौन सा खुदा सुनेगा मेरी, किसको ढूँढूँ, किसके दर जाऊँ मैं?
और इस नन्ही सी जिंदगी में दो पल ही तो जीना है मुझे,
और आप चाहते हैं भुला दूँ सपनों को और आज ही मर जाऊँ मैं!
5. प्यार, खूबसूरती और ख़ामोश जज़्बात (Love, Beauty & Silent Feelings)
मोहब्बत में सिर्फ जुदाई नहीं होती, कुछ पल ऐसे भी होते हैं जो दिल में हमेशा के लिए अमर हो जाते हैं—उनकी सादगी, उनकी बातें और उनकी यादें।
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आज हवाओं में कुछ अलग सी बात नज़र आती है,
मैं जब चाँद को देखता हूँ, मुझे वो रात नज़र आती है।
खैर, पाना चाहता हूँ तुम्हें जिंदगी भर के लिए,
पर क्या करूँ, तुम्हारे बाप को मेरी जात नज़र आती है!
17
ये तुम्हारी ज़ुल्फ़ें आँखों पर आती हुई अच्छी नहीं लगतीं,
इन्हें हाथों से हटा दूँ क्या?
एक बात ख्वाबों में बोला करता था अक्सर,
इजाजत दो तो बता दूँ क्या?
और आसमान में क्या देखते हो चाँद को जाकर तुम,
तुम कहो तो तुम्हें आईने में दिखा दूँ क्या?
27
जिस जाम से तुम पी रहे हो, उससे कभी हम पिया करते थे।
और जिन आँखों में तुम्हें तुम्हारी दुनिया नज़र आती है, उस दुनिया में कभी हम जिया करते थे।
और आज बेहद खुश हैं हम, यह रहम है मेरे खुदा का मुझ पर,
वरना हम खुदा की कसम भी उनके सर पर हाथ रखकर लिया करते थे!
28
ऐ चाँद, तुझे उन तारों से बेहद मोहब्बत है, मैं जानता हूँ,
आसमान ही तेरा घर है, मैं मानता हूँ।
पर मेरे महबूब से यह वादा कर चुका हूँ,
तुझे उसकी हथेली पर सजाने का दावा कर चुका हूँ।
पहले भी कई कसमें-वादे खाए हैं, जिन्हें धीरे-धीरे पूरा करूँगा,
मुकद्दर में बेशक काँटों भरी जिंदगी हो, पर अब तेरे साथ ही मरूँगा।
पढ़ा-लिखा न सही मैं, पर उनकी आँखें पढ़ना बखूबी जानता हूँ,
शायद रब दिखता है उनकी आँखों में हमें, या फिर रब को उनका चेहरा मानता हूँ।
सिर्फ मोहब्बत ही नहीं उनसे, वो हमारी सांसें, धड़कन, तिनका-तिनका बन गईं,
हमारी आदत, जरूरत, जान, जिंदगी, फलाना-डिमका बन गईं!
हमारे हर सांस लेने पर वो हमारे रोम-रोम से घूम कर आती है,
इसलिए सिगरेट नहीं पीते हम, क्योंकि सुना है सिगरेट से जान चली जाती है!
यारों के बिना पीने को कहे कोई तो शायद पी लेंगे हम,
पर उनके बिना जीने को कहे कोई तो मौत का रास्ता अच्छा है।
लाख झूठ बोले हों बेशक, पर प्यार करता हूँ और वास्ता ही सच्चा है।
औरों की कहानियों की तरह ना तो तुम्हारे होंठ गुलाब की पंखुड़ी हैं,
ना तो तुम्हारी अदाओं में कोई शरारा है।
तुम तो कुदरत की बनाई हुई एक सोबर सी लड़की हो,
जिसको जमीन पर सिर्फ मेरे लिए उतारा है!
हवाएँ सुहानी लगती हैं, उनकी बातें रूहानी लगती हैं,
फ़िज़ाओं में कुछ जानी-पहचानी खुशबू जान पड़ती है, तेरी सांसों की रवानी लगती है।
और कहते हैं नाम लूँगा तो बदनाम हो जाओगी तुम,
पर सच कहूँ तो हर खूबसूरत मंज़र में हमें ‘शिवानी’ लगती है!
6. खुद को संभालना, रुतबा और नई शुरुआत (Moving On, Self-Respect & Motivation)
आखिरकार इंसान को समझ आता है कि किसी के जाने से ज़िंदगी खत्म नहीं होती। खुद का रुतबा बढ़ाना, आत्मसम्मान को बचाना और नया रास्ता चुनना ही असली जीत है।
15
अगर कभी किस्मत से किसी रास्ते पर टकराएंगे,
ना देखेंगे तुमको, ना अपना चेहरा दिखाएंगे।
किसी अनजान मुसाफिर की तरह तुम भी गुजर जाना,
हम भी गुजर जाएंगे… यह वादा करता हूँ।
मोहब्बत ही इतनी की थी तुझसे, इसलिए नफरत भी बेहद ज्यादा करता हूँ।
अब सब कुछ ठीक है, मगर तेरा वापस आना फ़िजूल है,
तू मोहब्बत थी मेरी, इसलिए तेरा हर गम भी कबूल है।
अब रोज काँटों सी जिंदगी जिएंगे,
ना जाने कितनी रातें काली होंगी,
खुला आसमान होगा, बारिश की बूंदें होंगी, पर तेरी बाहें खाली होंगी।
मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल है तू,
अब नहीं कहूँगा कि कबूल है तू!
ज़र्रा-ज़र्रा तेरी बेवफ़ाई के किस्से गा रहा है,
तेरा आशिक अपनी रातों की कहानियाँ सुना रहा है।
बता रहा है किस तरह तूने उसकी बाहों में भी वही वादे किए हैं—जिंदगी साथ बिताने के इरादे किए हैं।
तुझसे नफरत करने वालों में से भी चुनिंदा हूँ मैं,
यह चिट्ठी लिखकर पहुँचाने वाला परिंदा हूँ मैं।
और तू खुश है तो खुश रह, बस इतना समझ लेना—
तेरे बगैर भी ठीक हूँ, खुश हूँ और जिंदा हूँ!
26
अब रुतबा थोड़ा ऊँचा कर लिया है,
और तू वापस आए मेरी जिंदगी में, ये तेरी तकदीर नहीं है।
मैं तो मर गया था कब का राँझा बन के, पर तू कोई हीर नहीं है।
और फिर लाऊँ तुझे जिंदगी में, तड़पाऊँ दिल इस कदर बार-बार…
दिल है? तेरे बाप की जागीर नहीं है!
32
मेरा साथ गवारा नहीं? कोई बात नहीं।
इस घर में गुजारा नहीं? कोई बात नहीं।
पर मैं तो तुम्हारा था, जिसके बिना तुम रह भी नहीं सकते,
क्या कहा? “मैं भी तुम्हारा नहीं?”… कोई बात नहीं!
33
देकर धोखा मुझे, तेरा गुजारा क्या होगा?
मनमर्जी से डूबते को तिनके का सहारा क्या होगा?
और जिसने इतनी बेरहमी से बेवफ़ाई की है हमसे,
वो शख्स कमीना ही होगा, बेचारा क्या होगा!
34
जरूरत पर अपनों को आजमाया है मैंने,
फूलों से भी जख्म खाया है मैंने।
और मतलब से तो रिश्ते तुम निभाते हो,
बेमतलब के रिश्तों को भी निभाया है मैंने!
36
तुझको बख्श दिया, खुद की जान ली,
तुझको पाना है, बस यह बात ठान ली।
तूने बताई गलतियाँ जमाने को मेरी,
चल मैंने भी अपने कान पकड़े और गलती मान ली!
तेरे बिना यह जिंदगी अधूरी सी है,
बस तू वापस आ जा, तू जरूरी सी है।
आजकल मेरी हर दुआओं में तू है,
हर मंज़र में तू, हवाओं में तू है।
कलम है लिखने के लिए मेरे पास, बस तेरा हाथ चाहिए,
मुझे जिंदा रहने के लिए सिर्फ तेरा साथ चाहिए।
कभी भी मेरी याद आए तो वापस आ जाना,
तेज़ आंधियों के साथ बरसात आए तो वापस आ जाना!
उसी बरसात में बाहें खोलकर तुम्हारा इंतजार करूँगा,
चाहो तो परख कर देख लेना, आखिरी सांस तक तुमसे प्यार करूँगा।
मेरा पास आना सही नहीं लगा तुम्हें, तो चलो थोड़ी दूरी छोड़ रहा हूँ,
तुम्हारी याद में पी ली जितनी पीनी थी मुझे, आज से पूरी छोड़ रहा हूँ।
और किसी रोज आकर इस कागज के नीचे अपना नाम लिखकर जाओगी तुम,
इसी उम्मीद में इस नज़्म को अधूरी छोड़ रहा हूँ…
37
देख, तेरे जाने पर भी यह जिंदगी थमी नहीं,
सब कुछ है मेरे पास, कोई कमी नहीं।
तेरी यादों को अपने ज़हन से निकाल फेंका हमने,
खिलखिला उठे हैं, अब आँखों में भी नमी नहीं।
जिंदगी के इस सफर में अकेले ही निकल पड़ा हूँ मैं,
जहाँ छोड़ा था तूने, वहाँ से तो अब चल पड़ा हूँ मैं।
अब किसी को खोने का डर नहीं सताएगा,
मंजिल का रास्ता तुझे कोई नहीं बताएगा।
रातों का जुगनू बनकर तुझे खुद राहें ढूँढनी हैं,
जो तेरे लिए सच्ची हो, अच्छी हो, ऐसी बाहें ढूँढनी हैं।
कोई शिकवा न उसकी रुसवाई से करेंगे,
जिसमें गिरेंगे बार-बार, मोहब्बत भी उसी खाई से करेंगे।
और मेरे प्यार में ही कोई कमी रही होगी,
सोचकर अगली दफा का इश्क और गहराई से करेंगे!
San के विचार: दर्द से हौसले तक का सफ़र
ज़िंदगी में हर इंसान को ऐसे दौर से गुज़रना पड़ता है जहाँ सब कुछ बिखरा हुआ महसूस होता है। लेकिन शायरी का असल मक़सद केवल आंसू बहाना नहीं, बल्कि उन आंसुओं को पोंछकर मुस्कुराने की वज़ह तलाशना है।
- दर्द को स्वीकार करें: जो छूट गया, उसे जबरदस्ती पकड़े रहने से हाथ छिल जाते हैं। वक्त को वक्त दें।
- आत्मसम्मान से समझौता न करें: मोहब्बत खूबसूरत है, लेकिन आपकी अपनी इज़्ज़त और रुतबा उससे भी ऊपर है।
- उम्मीद बनाए रखें: जैसा कि आख़िरी नज़्म कहती है—“तेरे जाने पर भी यह जिंदगी थमी नहीं…” उठिए, अपने अधूरे सपनों को पूरा कीजिए और फिर से मुस्कुराकर जीना शुरू कीजिए।






