Kabir Ke Dohe in Hindi PDF Free Download

Kabir Ke Dohe in Hindi PDF: कबीर के दोहे हिंदी में अगर आप भी पढ़ना चाहते है और Kabir Ke Dohe in Hindi free PDF को डाउनलोड करना चाहते है, तो इस पोस्ट हम आपको देंगे 150 से अधिक दोहे कबीर दास के जिसे पढ़कर आप बहुत ही अच्छा महसूस करेंगे वैसे तो कबीर दास के दोहे 300 से अधिक है। जिनमें से हम आपको कबीर दास के सबसे अच्छे दोहे का चयन किया है उसके अर्थ सहित जिसे आप पढ़ भी सकते हैं। और इसका पीडीएफ फाइल भी डाउनलोड कर अपने मोबाइल में सेव कर सकते हैं।

Kabiradas Hindi Doha, Kabir ke Dohe in Hindi PDF free Download, Kabir Ke Dohe in Hindi with Meaning, Best Kabir ke dohe Hindi me, Kabiradas Doha PDF, Hindi Kabir Ke Dohe Free PDF Download, Kabir ke famous Dohe hindi, Kabir ke dohe arth Sahit,

Kabir Ke Dohe in Hindi PDF

बात अगर कबीर दास की करें तो कबीरदास का जन्म 14 या 15वी शताब्दी के बीच हुई थी जिनका मृत्यु 124 साल बाद हुआ था कबीर दास एक महान कविता के लेखक थे जिन्होंने अपने जीवन में सैकड़ों कविताओं दोहे और लोगों के जीवन में होने वाले उतार-चढ़ाव को समझते हुए ऐसे ऐसे दोहे लिखे हैं।

जिन्हें हर इंसान पढ़ना चाहता है इसीलिए हम आपके लिए लेकर आए हैं कबीर के दोहे हिंदी में पीडीएफ फाइल को जिसको आप यहां से फ्री में डाउनलोड कर सकते हैं हम आपको नीचे एक महत्वपूर्ण लिंक देंगे जिसकी मदद से आप इन Kabir के Dohe को आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं।

कबीर के दोहे हिंदी में पढ़ने के लिए लोग अक्सर गूगल में सर्च करते रहते हैं लेकिन कबीर दास के दोहे एक ही साथ खूब सारे यूजर्स को एक बार में नहीं मिल पाते हैं इसीलिए हम आपके लिए लेकर आए हैं कबीर दास के फेमस और प्रचलित दोहे वह भी अर्थ सहित जिसे पढ़कर आप काफी प्रफुल्लित होंगे और आपके जीवन में आपके विचार हैं नए बदलाव आएंगे आपके जीवन में गंभीरता बढ़ेगी आप अपने मन पर अपनी सोच पर कंट्रोल बना सकते हैं।

Read More: Kabir Ke Dohe in Hindi PDF Free Download

Kabir Ke Famous Dohe Hindi Me

हम आपको कबीरदास के कुछ फेमस यहां पर दे रहे हैं जिसको आप पढ़ सकते हैं और यदि आप इसका पीडीएफ डाउनलोड करना चाहते हैं तो नीचे स्पेलिंग मैंने दे रखा है जिसमें डेढ़ सौ से अधिक कबीरदास के बेहतरीन दोहे मौजूद है।

बड़ा चीनी रहिबे मत, चहूँ ओर खाए।

चोट लागे चहूँ ओर, जब काहे कोय॥

अर्थ: पीजीआई में बड़े स्वार्थी बनकर मत रहिए सभी तरफ खाने की इच्छा रख। चोट लगे तो सभी तरफ बगावत करेगा, जब कोई कहे तो॥

पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय।

ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय॥

    अर्थ: अनंत किताबें पढ़ पढ़ कर बरसों से लोग मर गए, लेकिन पंडित कोई ना बन सका। जिसने सिर्फ ढाई अक्षर प्रेम का पढ़ लिया प्रेम को समझ लिया उसी को कबीर दास ने असली पंडित माना जो हर शब्द में प्यार की बाड़ी बोले।।

साधो देखो जगबौराना, जिनका आप हार।

बारम्बार उधर जाए, इधर ते बहुत भार॥

     अर्थ: साधुओं को देखो, जग में जिन्हें कुछ भी नहीं चाहिए। वे बारम्बार उधार (दिव्यता की ओर) जाते हैं, जबकि यहां बहुत सारा भार लेने वाले हैं॥

जाति ना पूछो साधु की, पूछ लिजिये विचार।

मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यार॥

     अर्थ: कबीरदास कहते हैं किसी संत का जाति ना पूछो उस संघ का विचार जानू उसके ज्ञान से कुछ नया सीखो। जैसे म्यान में पड़ी तलवार की मोल होती है लेकिन म्यान की कोई मोल नहीं होती॥

जो तुमको हो पसंद असी, रीझे सब कोय।

मन भावे रीझाए, मन भावे सोय॥

अर्थ: जो तुम्हें पसंद हो, उसे सभी कोई रीझता है। मन को जो भाए उसे रीझा लो, मन को जो भाए उसमें सोचो॥

गुरु गोबिंद दोऊ खड़े, काके लागू पांव।

बलिहारी गुरु आपने, गोबिंद दियो मिलाए॥

अर्थ: गुरु और गोविन्द भगवान दोनों खड़े हैं, किसके मैं पैर पढू। परन्तु मैं गुरु को बलिहारी मानता हूँ, क्योंकि उन्होंने मुझे गोविन्द भगवान से मिलाया है॥

सबको खबर देखी, मैं तो नाही जानी।

गुरु गोविन्द दोऊ खड़े, काको छलीहारी॥

अर्थ: सबको खबर मिल जाती है, मैं तो नहीं जानता। गुरु और गोविन्द दोनों खड़े हैं, काको को छोड़ दिया है॥

कबीरा ते नर अंध है, गुरु को नाही जान।

समझे बिनु सासर बेरा, त्यागे विद्या भखान॥

अर्थ: कबीरा कहते हैं ऐसी मानव वह अंधे हैं जो अपने गुरु को नहीं समझते। सासर और बेरा (संसार और विद्या) को बिना समझे, विद्या को छोड़ देते हैं॥

बढ़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।

पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर॥

अर्थ: बढ़ा होने से क्या होता है जिस प्रकार खजूर का पेड़ बढ़ जाता है और उसके तने पत्तियां बहुत ही ऊपर हो जाती हैं। इसके वजह से नाही पंछी को उससे छाया मिलती है और फल भी बहुत दूर लगता है॥

पंची घर अंधेरा, दूर आंधियारा।

उजियारी जब सुनिये, तब बुढ़ा हुआ न्यारा

अर्थ: पंची अपने घर में अंधेरे में हैं, पर दूर जब अंधियारे से ऊजियारी की आवाज सुनते हैं, तो वे बुढ़ा हुआ न्यारा बन जाते हैं॥

माती को पुत्र बिगाड़े, पुत्र को मात बिगारी।

बिगारी मात मातिगे, ज्यों बिगारे सो पारी॥

अर्थ: माती को पुत्र बिगाड़ सकता है, पुत्र माता को बिगार सकता है। बिगारी हुई माता मातजी को बिगारेगी, जैसे बिगारे वे ही पारी को॥

माटी छाछ सब भए, खाहू और ना तैं।

भई घी का भाव, चढ़े अंबर जाई॥

अर्थ: सभी को मिट्टी और छाछ स्वीकार है, तू कुछ नहीं। जब घी के भाव में आएगा, तो वह अंबर को चढ़ जाएगा॥

कागज कलम नहीं राखी, लखोटा लगाय।

कह कहाय सब आपनी, बिरलो न कोय॥

अर्थ: कागज और कलम को नहीं रखने के बजाय, लखोटे में चुपाया। सभी खुद खुद को कहते हैं, पर किसी को नहीं कहते॥

जैसे ढूंढत बढ़ाए, वैसे ही घटे जाय।

कबीर तू रही नजरे, मुझसे भटकत जाय॥

अर्थ: जैसे ढूंढते हैं वैसे ही घटते जाते हैं। कबीर, तू रहे नजरों में, मुझसे भटकते जाए॥

एक दिन आवसी खाँब, दूजी दिन जाए।

तीसरे दिन मूर्ख आवे, दरियां पर बावन जाए॥

     अर्थ: एक दिन खाँब में रहते हैं, दूसरे दिन जाते हैं। तीसरे दिन मूर्ख आते हैं, बावन दरियां पार कर जाते हैं॥

पंथी चलत मोक्ष मार्ग, वैष्णव नाहिं जान।

लोभी पंथी कहलावे, भोला भगवान॥

अर्थ: पंथी मोक्ष के मार्ग पर चलते हैं, वैष्णव (भक्ति मार्गी) नहीं जानते। लोभी पंथी कहलाते हैं, परन्तु भगवान भोला हैं॥

Download PDF

सारांश:-

इस पोस्ट में हमने आपको कबीरदास के सभी फेमस दोहे को शामिल किया है जिसका पीडीएफ आप दिए गए लिंक की मदद से डाउनलोड कर सकते हैं। यदि आपको कबीरदास के और अधिक दोहे चाहिए तो आप हमें कमेंट सेक्शन में लिखकर बताएं हमने इस पीडीएफ में सभी दोहे अर्थ सहित दिया है।

अक्सर पूछें जाने वाले प्रश्न:

Kabir Ke Famous Dohe Hindi Me?

कबीर खड़ा बाजार में सबसे मांगे खैर। ना किसी से दोस्ती ना किसी से बैर।।

कबीर के दोहे हिंदी में अर्थ सहित?

बुरा जो देखन मैं चला बुरा न मिलिया कोय।
जो मन अपन देखया मुझसे बुरा न कोय।।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top